Fri Feb 27 11:26:28

भारी हंगामे के बीच लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पेश
नई दिल्ली। बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर संसद के सदनों में हंगामा जारी है। हंगामे के बीच ही ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में बिल पेश किया, जिसके बाद समूचे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट यह कर दिया।
शून्यकाल में कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने मदर टेरेसा को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा की गई टिप्पणी का मुद्दा उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि टिप्पणी सदन के बाहर की गई है इसलिए सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
दूसरी ओर, राज्यसभा में सदन के नेता व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब तक देश में 639 अध्यादेश के जरिये कानून लागू किए गए और उनमें से 80 फीसद कांग्रेस के शासनकाल में हुए। नेहरू के काल में 70 अध्यादेश लाए गए। संयुक्त मोर्चा सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में 77 अध्यादेश लाए गए। उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा यूपीए सरकार की जिस सरकार में मंत्री थे वह भी कई अध्यादेश पारित करा चुकी है। इसलिए अध्यादेश के जरिये संसद की अनदेखी का आरोप सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब राज्यसभा में बिल पेश होगा तो सदस्य इस पर बहस करें और अगर किसी मुद्दे पर सहमति बनती है तो इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। इस पर कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि नेहरू के वक्त और आज के वक्त में बहुत अंतर है। जिस अध्यादेश का भाजपा विरोध करती थी वहीं काम उसकी सरकार क्यों कर रही है। कौन सा आपतकाल आ गया जो अध्यादेश लाया गया।
जदयू सांसद शरद यादव ने कहा बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश में सबसे बड़ा उद्योग खेती है और 80 फीसद आबादी इस पर निर्भर है। सरकार उसी को संकट में डालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल लाने का विचार त्याग देना चाहिए। वहीं बसपा सांसद मायावती ने कहा कि इस कानून से किसानों का नुकसान और उद्योगपतियों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार चर्चा के बाद बिल लेकर आई थी। लेकिन वर्तमान सरकार अध्यादेश लाकर तब चर्चा कराना चाहती है। यह ठीक नहीं है।
इससे पहले आज भाजपा संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को बेहतरीन बताते हुए कहा कि बिल पर पीछे हटने की जरूरत नहीं है। हां, अगर कुछ अच्छे सुझाव आते हैं तो हम इसमें संशोधन को तैयार है। उन्होंने कहा कि बिल में जो संशोधन किए गए हैं वे कांग्रेस शासित राज्यों के सुझाव पर आधारित हैं।
गौरतलब है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर सोमवार शाम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत संसदीय बोर्ड के अधिकतर सदस्य जुटे। बताते हैं कि नेतृत्व ने मन बनाया है कि सरकार अपने एजेंडे से वापस नहीं होगी। लेकिन सबको साथ करने के लिए कुछ संशोधन हो सकते हैं। उससे भी बड़ी कवायद यह होगी कि सरकार के पक्ष को जनता तक सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचाया जाए। किसानों को कैसे यह समझाया जाए कि नया कानून उनके हित में है और आम जनता को भी यह बताया जाए कि अधिग्रहण कैसे विकास के लिए जरूरी है। सूत्रों के अनुसार, भूमि सुधार परिषद की बैठक बुलाने का भी फैसला लिया गया। इस मुद्दे पर राजनाथ मंगलवार को गैर सरकारी संगठनों के साथ बातचीत जारी रखेंगे।
अन्ना को समझाने की कोशिश
इसकी तो जानकारी नहीं है कि धरने पर बैठे अन्ना से बातचीत की कोई प्रक्रिया शुरू होगी या नहीं लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें समझाने की कोशिश शुरू हो चुकी है। पार्टी के कुछ नेताओं का उनसे संवाद हो रहा है। गौरतलब है कि भूमि अधिग्रहण और किसानों के मुद्दों को सुलझाने का जिम्मा पार्टी ने राजनाथ के कंधे पर छोड़ा है। शनिवार को भी उनके आवास पर किसान नेताओं के साथ बैठक हुई थी।
भूमि अधिग्रहण मामले में प्रापर्टी डीलर का काम कर रही सरकार
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ अनशन में आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पहुंचे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में प्रापर्टी डीलर की भूमिका अदा कर रही है। उनका आरोप था कि यह सब उद्योगपतियों के इशारे पर किया जा रहा है। अब सरकार उनकी दलाल बनने का काम कर रही है।
अन्ना के अनशन का आज दूसरा और अंतिम दिन है। उन्होंने इस कानून में हुए संशोधन पर सरकार की जमकर खिंचाई की है। इससे पहले अन्ना ने कहा था कि केंद्र सरकार अंग्रेज सरकार की तरह फैसले ले रही है, जबकि यह जनता द्वारा चुनी गई सरकार है।
अपने संबोधन में अन्ना ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। अब हर गांव में इस कानून के खिलाफ पदयात्रा निकाली जाएगी और चार माह के बाद एक बार फिर से रामलीला मैदान में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन मोदी सरकार का दिमाग सही करने के लिए होगा। अन्ना का मंच साझा करने वालों में एमडीएमके नेता वाइको भी शामिल हैं।
केजरीवाल के यहां पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। अन्ना ने सोमवार को इस मुद्दे पर केजरीवाल और मनीष सिसौदिया से महाराष्ट्र सदन में मुलाकात की थी।
मांझी के ये 10 फैसले नीतीश के लिए किसी चुनौती से कम नहीं
पटना। बिहार की राजनीति में पिछले दिनों हुए घमासान के बाद भले ही अब यहां की राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी द्वारा अपने कार्यकाल के अंतिम समय में लिए कई फैसलों को बदलना मौजूदा सीएम नीतीश कुमार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। दरअसल, अपनी कुर्सी जाती देख मांझी ने कार्यकाल के अंतिम दिनों में कई बड़े फैसले लिए थे इनमें दलितों को जमीन देना, महादलितों को सुविधाएं बढ़ाना, पुलिसकर्मियों के वेतन संबंधित जैसे कई फैसले शामिल थे।
दलितों को अधिक जमीन -
2008 में नीतीश कुमार ने ढाई लाख महादलित परिवारों को तीन डेसीमल [1306 वर्ग फीट] भूमि दी जाएगी, जिनमें से 50 हजार को लाभ मिल चुका है। मांझी ने इसे बढ़ाकर पांच डेसीमल कर दिया। राज्य सरकार इस जमीन को मार्केट रेट से सरकार खरीद कर महादलितों को देगी। संशोधित निर्णय के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी।
पासवान जैसे महादलित -
कार्यकाल के अंतिम समय के दौरान मांझी ने महादलितों के दलितों के साथ अंतर को कम किया तथा सुविधाएं बढ़ाने को कोशिश की। इस वोट बैंक के लिए रामविलास पासवान की धमकी के बाद मांझी के लिए इस निर्णय को वापस लेना भी नीतिश के लिए मुश्किल होगा।
शुल्क छूट -
मांझी ने दो माह पहले फैसला लिया था कि एससी व एसटी से संबंधित छात्राओं से स्नातक की पढ़ाई के दौरान कोई फीस नहीं ली जाएगी। महिला मतदाताओं के लिए यह योजना जाति विशेष के लिए देखी जा रही थी। नीतीश कुमार इस फैसले को रद करते हैं तो यह फैसला महादलितों को उनके खिलाफ कर सकता है।
महिला कोटा -
मांझी ने नीतीश के पूर्व के कार्यकाल के दौरान सरकारी नौकरी में मिलने वाले कोटे को 35 फीसद बढ़ा दिया। अगर नीतीश इस फैसले को वापस लेते हैं तो मांझी इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।
छात्रवृत्ति बढ़ाई -
नीतीश कुमार ने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाली सभी जाति वर्ग की छात्राओं को दस हजार रुपये की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की थी। मांझी ने इस छात्रवृत्ति योजना में द्वितीय श्रेणी में पास होने वाली गरीब घरों की छात्राओं को भी शामिल कर लिया है।
काम पर 25 वर्ष -
टोला सेवक और विकास मित्र के रूप में नीतीश कुमार ने महादलित के लोगों को रखने का फैसला किया था इसमें मांझी ने इन्हें 25 वर्ष तक काम में रखने का फैसला लिया है।
किसानों के लिए निशुल्क बिजली -
जिन किसानों के पास पांच एकड़ जमीन है उन्हें निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने का निर्णय भी मांझी ने लिया है। यह सीधे तौर पर किसानों से जुड़ा है, लिहाजा इसको बदलना नीतीश के लिए आसान नहीं होगा।
मांझी मंत्रिमंडल के फैसलों की खुले मन से होगी समीक्षा : नीतीश
मदरसों का आधुनिकीकरण -
मांझी ने मुस्लिमों के लिए हज भवनों तथा मदरसों की दशा सुधारने तथा उनके आधुनीकीकरण की घोषणा की। इस फैसले को भी नीतीश रद नहीं कर सकते हैं। हालांकि उनके पास समय ज्यादा नहीं है तो वह इन फैसलों को अमलीजामा पहना सकते हैं।
एससी-एसटी पुलिस अधिकारियों के लिए -
नीतीश ने प्रत्येक जिले में अनुसूचित जाति के पुलिस स्टेशन खोलने का निर्णय लिया था लेकिन उसमें मांझी ने सभी 850 पुलिस थानों में एक अधिकारी एससी-एसटी से संबंधित रखने का फैसला लिया।
पुलिस कर्मियों का वेतन-
मांझी ने पुलिस में तैनात कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक सभी कर्मियों को हर वर्ष 13 माह का वेतन देने का निर्णय लिया है। इस फैसले को भी नीतिश कुमार के लिए बदलना टेढ़ी खीर साबित होगा।
अखिलेश ने पेश किया तीन लाख दो हजार करोड़ का बजट
लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज विधान भवन में 3.02 लाख करोड़ का बजट पेश किया। यह सीएम अखिलेश यादव का चौथा बजट है। विधान भवन के तिलक हाल में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वित्तीय वर्ष 2015-16 का जो बजट पटल पर रखा वह बीते वर्ष के मुकाबले 10.20 प्रतिशत अधिक का है।
इस बार बजट में 21 शहरों से स्लम हटाने के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। गोमती की सफाई के लिए 400 करोड़ का बजट पास हुआ जबकि सड़क और पुल के लिए 12 हजार करोड़ का बजट है। स्वच्छ भारत मिशन के लिए सरकार ने 1533 करोड़ की व्यवस्था की है। इस बार अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 2776 करोड़ तथा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे को 3000 करोड़ दिया गया है। लखनऊ मेट्रो के लिए 425 करोड़ का बजट पास। मेडिकल टीचर्स अब 65 की आयु में रिटायर होंगे। अब दवाओ के लिए 587 करोड़ का प्रावधान किया। सरकार ने 2100 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। परिवार कल्याण के लिए 5840 करोड़ का बजट है तो सरकार की प्राथमिकता वाली समाजवादी पेंशन स्कीम को 2727 करोड़ व लैपटॉप स्कीम के लिए 100 करोड़ का बजट दिया गया है। इसके साथ ही यूपी का राजकोषीय घाटा 2.96 प्रतिशत पहुंचा। यूपी का ग्रोथ रेट 5 प्रतिशत तक पहुंच गया जो कि नेशनल ग्रोथ रेट से ज्यादा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 को किसान वर्ष घोषित किया जाएगा। प्रदेश में एक हजार एग्री जंक्शन स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने गन्ना किसानों के भुगतान के लिए 1152 करोड़ रुपये की व्यवस्था की हंै। अगले वर्ष से गांवों को न्यूनतम 16 घंटे व शहरों को 22-24 घंटे बिजली आपूर्ति के मद्देनजर बजट में 25764 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही सरकार ने आजमगढ व लखीमपुर खीरी में कृषि विश्वविद्यालय बनाने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही लखनऊ में 168 करोड़ से लागत से साईकिलिंग अकादमी बनेगी तो कानपुर के ग्रीन पार्क के लिए 33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज जो बजट पेश किया, उसमें बुनियादी ढांचे के विकास को तरजीह देने की चाहत के साथ सरकार की कुछ सियासी मजबूरियों की अकुलाहट भी महसूस की जा रही है। इसी वजह से बजट के पिटारे में बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार को धार देने के लिए आवश्यक संसाधनों के बंदोबस्त के साथ ही लोकलुभावन योजनाओं की ओर वापसी का इंतजाम है। अखिलेश सरकार 2015-16 में भी बुनियादी ढांचे के विकास पर फोकस जारी रखा है। समाजवादी पार्टी के सर्वाधिक असर वाले जिलों से गुजरने वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर तो सरकार की मेहरबानी जारी है। लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना को रफ्तार देकर भी अखिलेश सरकार विकास को लेकर अपनी साख बढ़ाने की कोशिश की है। सड़क-सेतुओं के निर्माण व रखरखाव को लेकर सरकार दरियादिली दिखाने के साथ ही प्रदेशवासियों को कहीं ज्यादा बिजली देने के लिए ऊर्जा सेक्टर पर भी पिछले बजट की तरह इनायत बरकरार रही। बिजली के साथ अगले साल के बजट में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भरपूर कोशिश है। मुख्यमंत्री की पहल को अमली जामा पहनाने के लिए कई शहरों में साइकिल ट्रैक बनाने के लिए भी सरकार संसाधन मुहैया कराएगी।
तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के कगार पर पहुंची अखिलेश सरकार अगले विधानसभा चुनाव में जनता के बीच अपनी जवाबदेही को लेकर भी सतर्क है। वह जवाबदेही जो पिछले साल सपा के घोषणा पत्र की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विराम लगाने से उपजी थी। बीते वर्ष से बंद की गईं कन्या विद्या धन और लैपटॉप वितरण योजनाओं को बजट के जरिये नये स्वरूप में सामने लाकर अखिलेश सरकार वादे से मुकरने का दाग धोएगी। बजट में इन योजनाओं की वापसी के साथ ही इसी साल होने वाले पंचायत चुनाव को देखते हुए लोहिया ग्रामीण आवास योजना, लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना और जनेश्वर मिश्र ग्राम्य योजना को सरकार और ज्यादा तवज्जो देगी। समाजवादी पेंशन योजना नये बजट में भी अखिलेश सरकार की फ्लैगशिप स्कीम रहेगी।
कृषि की विकास दर में गिरावट से निपटने के लिए बजट में इस सेक्टर पर भी जोर होगा। कृषि क्षेत्र में नई योजना के एलान के भी कयास लगाये जा रहे हैं। अल्पसंख्यकों के लिए शैक्षणिक हब विकसित करने की योजना को बजट के जरिये रफ्तार दी जाएगी। लखनऊ में गोमती, गढ़ मुक्तेश्वर में गंगा और वाराणसी में वरुणा नदी के तटीय विकास के लिए भी सरकार खजाना खोलेगी।
16 छक्के, 10 चौके, 147 गेंदें, 215 रन...विश्व कप में सुनामी !
कैनबरा। विश्व कप क्रिकेट 2015 में वेस्टइंडीज के बल्लेबाज क्रिस गेल ने इतिहास रच दिया। जिम्बाब्वे के खिलाफ ग्रुप बी के एक लिग मैच में खेलते हुए उन्होंने शानदार दोहरा शतक लगाया और इतिहास रच दिया। गेल वल्र्ड कप में दोहरा शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। इससे पहले वन डे क्रिकेट के इतिहास में ये कारनाम सिर्फ भारतीयों के नाम था। गेल से पहले ये उपल्ब्धि भारत के सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और रोहित शर्मा के नाम थी। इस तरह एक दिवसीय क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले वे चौथे खिलाड़ी भी बन गए हैं। इसके अलावा इस मैच में एक और नया कीर्तिमान बना जो क्रिस गेल और मार्वन सैमुअल्स के नाम रहा। दोनों ने वल्र्ड कप के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी साझेदारी निभाई। दूसरे विकेट के रूप में दोनों के बीच 372 रनों की साझेदारी हुई। ये एक विश्व कीर्तिमान है। इससे पहले किसी भी विकेट के बीच इतनी बड़ी साझेदारी नहीं हुई थी। शून्य के स्कोर पर पहला विकेट खोने वाली वेस्टइंडीज टीम के प्रशंसकों ने ऐसा सोचा भी नहीं होगा आज उन्हें इस तरह का मैच देखने को मिलेगा। इस मैच में अपना पुराना लय वापस पाते हुए तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल जिम्बाब्वे पर कहर बन कर टूटे। अपनी पारी के दौरान पहले 105 गेंदों पर 100 रन बनाने वाले गेल ने दूसरा शतक महज 138 गेंदों पर ही बना लिया। यह विश्व कप इतिहास का सबसे ज्यादा व्यक्तिगत स्कोर है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के गैरी कस्र्टन का 188 नाबाद रनों का रिकॉर्ड तोड़ा। कस्र्टन ने यह पारी 16 फरवरी 1996 को संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ रावलपिंडी में खेली थी। गेल का यह सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर है। इससे पहले वन-डे में उनका सर्वाधिक स्कोर 153 नाबाद था, जो उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ ही बुलावायो में बनाया था। विश्व कप में इससे पहले वेस्टइंडीज की तरफ से सर्वाधिक स्कोर 181 था, जो विवियन रिचड्र्स ने 13 अक्टूबर 1987 को कराची में श्रीलंका के खिलाफ बनाया था। गेल ने धीमी शुरुआत की थी। उनके 50 रन 51 गेंदों में बने। उन्हें 100 रनों तक पहुंचने के लिए 105 गेंदों का सामना किया था। इसके बाद अगली 21 गेंदों में वे 150 रनों तक पहुंचे थे (126 गेंदों में), जबकि 200 रनों की उपलब्धि तक पहुंचने में उनहोंने सिर्फ 138 गेंदों का सामना करना पड़ा। अपनी इस सुनामी पारी के दौरान उन्होंने 10 चौके और 16 छक्के लगाए। गेल वन-डे में दोहरा शतक लगाने वाले दुनिया के चौथे खिलाड़ी बने। इससे पहले भारत के सचिन तेंडुलकर, वीरेंद्र सहवाग और रोहित शर्मा (दो बार) ने वन-डे में 200 रन बनाए थे।
टीम इंडिया की जीत पर पूनम पांडे ने फिर उतारे कपड़े
मुंबई। अपने हॉट बयानों के साथ ही हॉट फोटो के लिए मशहूर मॉडल व एक्ट्रेस पूनम पांडे ने अपने चाहनेवालो की मांग पर एक बार फिर अपने कपड़े उतार दिए हैं।
विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के साथ जब टीम इंडिया का मैच चल रहा था, तो उस दौरान पूनम के चाहनेवालों ने ट्विटर पर हैशटैग बनाकर हल्ला मचा दिया कि कहां है पूनम और पूनम को बुलाओ। तो अपने चाहनेवालों की जबरदस्त डिमांड पर पूनम भी हाजिर हो गई। पूनम ने हर विकेट पर एक-एक कर कपड़े उतारते हुए अपनी कई हॉट तस्वीरें ट्विटर पर पोस्ट की। यह कोई पहली बार नहीं है कि पूनम ने अपने चाहनेवालों को ट्रीट दी है। बल्कि इससे पहले भी वे अपने बयानों के लिए चर्चित रही हैं कि अगर टीम इंडिया मैच जीत गई तो वे अपनी न्यूड तस्वीरें जारी करेंगी। पहली बार 2011 में उन्होंने वादा किया था कि अगर भारत विश्व कप जीतता है तो वे सारे कपड़े उतार देंगी। साथ ही वो लगातार हॉट फोटो और वीडियो ट्विटर और फेसबुक पर शेयर करती रही। कहा जाता है कि चर्चा पाने के लिए पूनम ऐसा करती हैं, ताकि उन्हें फिल्मों में रोल मिले और उनकी फिल्में हिट हो। तो चर्चा में आने के बाद बॉलीवुड में पूनम को पहली फिल्म नशा मिली, जो बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई। लेकिन फिर भी लाइमलाईट में बना रहना पूनम को अच्छी तरह आता है। एक बार फिर उन्होंने मौके का फायदा उठाया है, लेकिन उनके फैन्स तो पूनम की नई कंट्रोवर्सी के इंतजार में रहते हैं।
जा सकती है मप्र के राज्यपाल की कुर्सी, एसटीएफ ने दर्ज कराई एफआइआर

भोपाल। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में राज्यपाल राम नरेश यादव फंसते नजर आ रहे हैं। एसटीएफ की टीम ने मप्र. के राज्यपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। इस मामले में नाम उछलने के बाद अब उनकी कुर्सी पर भी खतरा मंडराने लगा है। वहीं इससे पहले एसआईटी के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस चंद्रेश भूषण ने कहा था कि जबलपुर हाई कोर्ट की ओर से जो निर्देश मिले हैं, उस पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है और मामले में राज्यपाल या मंत्री जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि एसआईटी की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट को रिपोर्ट भेजकर अतिविशिष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी गई थी। हाईकोर्ट ने 20 फरवरी को इस रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए कार्रवाई की अनुमति दे दी है।
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मुफ्ती मुहम्मद सईद 1 मार्च को लेंगे मुख्?यमंंत्री के रूप में शपथ!
नई दिल्ली। भाजपा और पीडीपी के बीच जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो गई है। सूत्रों की मानें तो मुफ्ती मोहम्मद सईद एक मार्च को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंंत्री के रूप में शपथ लेंगे। पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इसके संकेत दिए हैं। मंगलवार की शाम पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगी। पिछले कई दिनों से भाजपा-पीडीपी के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाने पर बातचीत चल रही थी। उधर सूत्रों की मानें तो इसके बाद पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद इस हफ्ते के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इससे संभावना जताई जा रही है कि भाजपा और पीडीपी के बीच सरकार बनाने को लेकर सहमति बन गई है। बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार एक मार्च को शपथ ले सकती है। पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से जब जम्मू-कश्मीर के सरकार गठन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लेकिन हम इस बारे में तब जानकारी देंगे, जब हम इसे कर लेंगे। बताया जा रहा है कि भाजपा और पीडीपी के बीच अफस्पा और अनुच्छेद 370 पर मतभेदों समेत अन्य सभी मुद्दों पर सहमति का रास्ता निकाल लिया है। गठबंधन को औपचारिकता प्रदान करने के लिए महबूबा मुफ्ती मंगलवार को नई दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करेंगी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में पीडीपी को 28 सीटें मिली हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। बीजेपी को 25 सीटें मिली हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की कुल 87 सीटें हैं।
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