Tue Aug 4 19:17:23

सावन का पहला सोमवार आज, शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़
नई दिल्ली। सावन महीने का पहला सोमवार आज है और देश भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा है। सभी शिव मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया है। देश के विभिन्न शहरों में भीड़-भाड़ और जाम के मद्देनजर ट्रैफिक पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है। साथ ही मंदिरों में भी सुरक्षा के मद्देनजर विशेष व्यवस्था की गई है। उधर, मंदिरों के अलावा घरों में भी पूजा-अर्चना के लिए विशेष तैयारियां की गई है। रविवार को व्रत और पूजा अर्चना के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए बाजारों में भी खासी भीड़ भाड़ नजर आई। सिंघाड़े की मिगी, कूटू का आटा आदि बाजार में सज गए हैं। वहीं मंदिरों में धतूरा, बेल पत्र, फूल माला और प्रसाद आदि की दुकानें सज गईं हैं। शिव मंदिरों समेत सभी मंदिरों में पूजा-अर्चना की विशेष तैयारियां की गई है और आकर्षक ढंग से सजाया गया है। बीते शनिवार 1 अगस्त को सावन महीने के शुरू होते ही प्रसिद्ध शिव मंदिरों में शिवभक्तों की विशेष आराधना और कांवर यात्रा का सिलसिला शुरू हो गया है। देश भर के प्रमुख शिव मंदिरों में जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालु कांवर लेकर निकल चुके हैं। खासतौर से हरिद्वार, देवघर इत्यादि शहरों के शिव मंदिरों में दूर-दूर से शिव भक्त गंगा व अन्य नदियों का जल लेकर चढ़ाने जाते हैं। इस यात्रा के रास्ते में कांवरियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है और पूरा माहौल शिव भजनों से भक्तिमय बना है। इस बार पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को पड़ रहा है।
इस बार हर सोमवार होगा खास, कई विशेष संयोग बनेंगे
शिव आराधना के 29 दिनी श्रावण मास का पहला सोमवार 3 अगस्त को आया । ज्योतिर्विदें के अनुसार इस बार आने वाले सभी चार सोमवार खास होंगे। इन पर विशेष संयोग बनेंगे और शिवालयों में आस्था का उल्लास उमड़ेगा। शिवालयों में महादेव का आकर्षक श्रृंगार किया गया। जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक के लिए भक्तों की कतारें लगी। हर-हर महादेव के जयघोष गूंजें।
पहले श्रावण सोमवार पर गणेश चतुर्थी और शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसके चलते पिता शिव और पुत्र गणेश के साथ पूजन का कल्याणकारी अवसर रहेगा।
10 अगस्त को दूसरे सोमवार पर एकादशी का व्रत शुभता प्रदान करेगा। 
तीसरे सोमवार 17 अगस्त पर हरियाली तीज होने के साथ स्वर्ण गौरी पूजन का विधान भी है।
अंतिम सोमवार को 24 अगस्त पर श्रावण शुक्ल नवमी और ज्येष्ठ नक्षत्र का संयोग बनेगा।
श्रावण माह का पहला सोमवार गजकेशरी महासंयोग में होगा। इस बार श्रावण के पहले सोमवार (3 अगस्त 2015 )के दिन गुरु सिंह राशि में व चन्द्रमा कुंभ राशि में दोनों ठीक आमने-सामने होंगे ।इस कारण गजकेशरी महासंयोग बनेगा । गुरु धर्म व सिद्धि साधना को देते हैं वहीं चन्द्रमा मन को स्थिरता देने वाला होता है जिसे भगवान शंकर अपने मस्तक पर धारण करते हैं।
प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करें
वैसे तो पूरे महीने में शिवजी की विशेष पूजा की जाती है। यदि कोई व्यक्ति शिवजी की कृपा प्राप्त करना चाहता है तो उसे प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए। विशेष रूप से सावन के हर सोमवार शिवजी का पूजन करें। इस नियम से शिवजी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। भगवान की प्रसन्नता से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परेशानियां दूर सकती हैं।
तो बनता है यह संयोग
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा से केंद्र में अर्थात पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव में बृहस्पति स्थित हो, तो गजकेशरी योग होता है। बहुत सी टीकाओं में बृहस्पति की लग्न से केंद्र स्थिति योगकारक मानी है लेकिन मूल योग चंद्रमा से ही समझना चाहिए।
राज योग भी है
पुराणों में बताया गया है कि यह एक प्रकार का राज योग है। जातक नेता, व्यापारी, विधानसभा का सदस्य, संसद, संस्था का मुखिया या राजपत्रित अधिकारी होता है। प्राय: इस योग वाले जातक जीवन में पर्याप्त उन्नति करते हैं और मरने के बाद भी उनकी यशोगाथा रहती है। चंद्रमा से केंद्र में अर्थात पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव में बृहस्पति स्थित हो, तो गजकेशरी योग होता है।
मिलता है अच्छा फल
हालांकि बहुत सी टीकाओं में बृहस्पति की लग्न से केंद्र स्थिति योगकारक मानी है लेकिन मूल योग चंद्रमा से ही समझना चाहिए। इसी योग में यदि शुक्र या बुध नीच राशि में स्थित न होकर या अस्त न होकर चंद्रमा को संपूर्ण दृष्टि से देखते हों तो प्रबल गज केशरी योग होता है। जब भी बृहस्पति की महादशा आएगी इसका उत्तम फल प्राप्त होगा। चंद्रमा की महादशा में भी अच्छे फल प्राप्त होंगे। राज केशरी योग वाले जातकों को बृहस्पति और चंद्रमा इन दो महादशाओं में से जो पहले आएगी उसमें अच्छा फल प्राप्त करते हुए देखा गया है।
शुभता के लिए यह भी जरूरी
आचार्य के अनुसार जिस व्यक्ति की कुण्डली में शुभ गजकेशरी योग होता है वह बुद्धिमान होने के साथ ही विद्वान भी होता है। इनका व्यक्तित्व गंभीर व प्रभावशाली होता है जिससे समाज में इन्हें श्रेष्ठ स्थान मिलता है। आर्थिक मामलों में यह बहुत ही भाग्यशाली होते हैं जिससे इनका जीवन वैभव से भरा होता है। लेकिन यह तभी संभव होता है जब यह योग अशुभ प्रभाव से मुक्त होता है। गजकेशरी योग की शुभता के लिए यह आवश्यक है कि गुरू व चन्द्र दोनों ही नीच के नहीं हों। ये दोनों ग्रह शनि व राहु जैसे पापग्रहों से किसी प्रकार प्रभावित नहीं हों।
नहीं रहता है अभाव
शुभ योगों में गजकेशरी योग को अत्यंत शुभ फलदायी योग के रूप में जाना जाता है। यह योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है उस व्यक्ति को जीवन में कभी भी किसी चीज का अभाव नहीं खटकता है। इस योग के साथ जन्म लेने वाले व्यक्ति की ओर धन, यश, कीर्ति स्वत: खींची चली आती है। जब कुण्डली में गुरू और चन्द्र पूर्ण कारक प्रभाव के साथ होते हैं तब यह योग बनता है। लग्न स्थान में कर्क, धनु, मीन, मेष या वृश्चिक हो तब यह कारक प्रभाव के साथ माना जाता है। चन्द्रमा से केन्द्र स्थान में 1, 4, 7, 10 बृहस्पति होने से गजकेशरी योग बनता है। इसके अलावा अगर चन्द्रमा के साथ बृहस्पति हो तब भी यह योग बनता है।
भाजपा भूली पहले इस्तीफा बाद में चर्चा की अपनी पॉलिसी- सोनिया
नई दिल्ली। सदन में गतिरोध को देखते हुए जहां एक ओर पीएम आज सदन में बयान दे सकते हैं वहीं कांग्रेस भी आज अपनी रणनीति बनाने में जुटी है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो सदन में गतिरोध कायम रहेगा। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि पार्टी सरकार के रवैये के खिलाफ अपना रोष जारी रखेगी। इस बैठक में शामिल पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मांगों पर कायम रहने की बात कही है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार को पूरी तरह से विफल करार देते हुए कहा कि अभी तक सरकार की ओर से सिर्फ वादे ही किए जा रहे हैं इसके अलावा सरकार ने कुछ नहीं किया है। वह सिर्फ वादों की झड़ी लगाती जा रही है और उनकी मार्केटिंग कर रही है। उन्होंने सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि किसान भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ हैं और सरकार इसे लाना चाहती है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को मिले जनाधार का अर्थ यह नहीं है कि वह अपनी जवाबदेही से बच सकती है। उन्होंने बैठक में एक बार फिर से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग दोहराई। बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा है कि वह करप्शन पर मंत्रियों का इस्तीफा चाहती है, इससे कम में वह नहीं मानने वाली। सदन में गतिरोध पर अपनी प्रतिक्रिया को सही बताते हुए उनका कहना था कि यूपीए काल में एनडीए ने विपक्ष में रहते हुए यही दांव अपनाया था, अब हम भी यही कर रहे हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। सोनिया का कहना था कि सरकार अपनी बातों को अब भूल गई है। विपक्ष में रहते हुए भाजपा कहती थी कि पहले इस्तीफा बाद में चर्चा। उन्होंने सदन में जारी गतिरोध के लिए सरकार को ही आड़े हाथों लिया और कहा कि कल तक चर्चा से पहले इस्तीफे को लेकर शोर मचाने वाली आज दूसरे सुर में अलाप रही है।
तालिबान का नया प्रमुख कंधार से ले गया था मसूद अजहर को
नई दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान की कमान संभालने वाला मुल्ला अख्तर मोहम्मद मंसूर वही शख्श है जो कंधार कांड में छोड़े गए आतंकी मौलाना मसूद अजहर को अपनी कार में बिठाकर ले गया था। इस बात का जिक्र रॉ के पूर्व अधिकारी अफसर आनंद अर्णी ने एक इंटरव्यू के दौरान किया है। कंधार कांड के समय आंतकियों को कंधार ले जाने वाली टीम में वह भी थे। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि कंधार में मंसूर ने मौलाना अजहर को गले लगाया और अपनी कार में बिठाकर ले गया। फिलहाल आनंद अर्णी बेंगलूर के तक्षशिला इंस्टीटयूट से जुड़े हैं। उन्होंने बताया है कि मंसूर को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का काफी करीबी माना जाता है। वह मुल्ला उमर का डिप्टी था और क्वेटा शूरा का चीफ भी है। गौरतलब है कि 1991 में भारत के प्लेन ढ्ढष्ट-814 को आतंकी हाईजैक करके अफगानिस्तान के कंधार ले गए थे, जिसे छुड़ाने के लिए भारत को तीन बड़े आतंकी रिहा करने पड़े थे। इसमें अजहर के साथ मुश्ताक अहमद जरगर और उमर सईद शेख को भी रिहा किया गया था। उस वक्त अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार थी और मंसूर उस सरकार में नागरिक उडडयन मंत्री था। इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि मौलाना अजहर के लिए उनका ट्रीटमेंट एक वीवीआईपी की ही तरह था। अर्णी के मुताबिक अन्य दो आतंकी जरगर और उमर सईद शेख को भी उसी प्लेन से लाया गया था, लेकिन वे मसूद अजहर के साथ जाने वालों में शामिल नहीं थे। अजहर ने रिहाई के बाद उसने एक नया आतंकी संगठन 'जैश ए मोहम्मद बनाया था। इसके कुछ समय बाद वह पाकिस्तान के बहावलपुर में देखा गया था। पिछले वर्ष उसने पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में एक बड़ी रैली भी की थी।
मैं बनूंगा मुसलमानों के बीच मोदी का दूत- साबिर अली
नई दिल्ली। कभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे विश्वस्त रहे साबिर अली आखिरकार भाजपा में शामिल हो ही गए। लोकसभा चुनाव से पहले पूरी तैयारियों के बावजूद ऐन वक्त पर वह भाजपा में आते-आते रह गए थे। मगर अब बिहार चुनाव से पहले उनकी वापसी भाजपा के शीर्ष स्तर से कराई गई है। संदेश स्पष्ट है कि बिहार में वह लालू-नीतीश गठजोड़ के खिलाफ मुस्लिमों के बीच में भाजपा की तरफ से जवाब होंगे। मगर उनको लेकर पार्टी के भीतर विरोध मुखर है, बयानबाजी का दौर जारी है। लेकिन , इससे बेखबर साबिर अली कहते हैं कि वह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने आए हैं। मुस्लिमों के बीच उनके दूत के रूप में काम करेंगे। वापसी के बाद पार्टी के बड़े नेताओं और प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली आए साबिर अली ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने प्रवास के दौरान एक समाचार पत्र के नेशनल चीफ ऑफ ब्यूरो राजकिशोर से बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश-
बिहार भाजपा में लोग आपके आने से खुश नहीं हैं। लोग क्यों नाराज हैं?
मेरा मकसद है काम करना। पार्टी में किसी भी शख्स के मन में जब यह बात आ जाए कि उसकी इमारत हिलने लगी है तो इस तरह की बात करने का प्रयास करता है। यह साधारण बात है। भाजपा में कौन नाराज है यह मैं नहीं जानता। मगर पार्टी में मैं जिस नीयत से आया हूं और जिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने का इरादा है, उसे पूरी शिद्दत के साथ करूंगा।
मगर इतने अपमान और विरोध के बावजूद भाजपा में आने की वजह?
जैसा मैंने कहा कि मुझे लगता है कि नरेंद्र मोदी एक ऐसा शख्स है जिसके नेतृत्व में काम करने की आवश्यकता है। यह ऐसे ही मैं नहीं कह रहा हूं। मोदी से मार्च 2014 में मुलाकात से पहले मैंने अहमदाबाद का सफर किया। चीजों को समझा और जाना फिर इस नतीजे तक पहुंचा। मुझे लगता है कि मुसलमानों की आज तक भाजपा से जो नजदीकी होनी चाहिए थी, वह बन नहीं सकी।
तो आप मुसलमानों के बीच मोदी का चेहरा होंगे?
चेहरा नहीं? मोदी सरकार की जो नीतियां हैं, मैं ईमानदारी से अपने लोगों के बीच पहुंचाऊंगा। मैं क्या कर सकूंगा पता नहीं, लेकिन अपनी बात मुस्लिमों के बीच सीना ठोक कर रखूंगा।
पहले तो मोदी के आप तीखे आलोचक थे, लेकिन आपका ह्रदय परिवर्तन कैसे?
आपका इशारा मैं समझ गया। चूंकि तब मैं जदयू में प्रवक्ता था लिहाजा जिस दल में हो, उसी दल की स्क्रिप्ट होती है। हमने ऐसी बहुत बातें मोदी के बारे में की हैं, जो गलत थीं या नहीं कहना चाहिए था। बाद में मुझे गलतबयानी के लिए खुद भी खेद हुआ।
तो कैसे माना जाए कि अब आप जो बोल रहे हैं, वह भाजपा की स्क्रिप्ट नहीं है?
इसलिए कि वहां जदयू एक आदमी की ही पार्टी थी। वहां, शरद यादव अध्यक्ष हैं, लेकिन कोई फैसला लेने की उनकी हैसियत नहीं है। जितनी मेरी समझ है, उनका निर्णय होता तो शायद जदयू दूसरी दिशा में जाता। वहां वही होता है जो नीतीश चाहते हैं।
होता तो भाजपा में भी वही है जो नरेंद्र मोदी चाहते हैं। वरना इतने विरोध के बाद भी आप कैसे आते?
मैं सहमत हूं। लेकिन यहां प्रधानमंत्री की नीयत और नीति देखनी होगी। उनकी नीति जो उन्होंने कहा है, वैसा ही सवा साल में किया है। कांग्रेस के शासनकाल में प्रधानमंत्रियों ने इंटरनेशनल फोरम पर नहीं कहा कि मेरे देश का मुसलमान उतना ही वफादार है, जितना कि अन्य लोग हैं। उनकी निष्ठा पर शक नहीं किया जा सकता। मोदी ने जो बातें कही हैं, उन पर अमल कर रहे हैं।
मगर सांप्रदायिक बयान तो भाजपा के नेता और केंद्र के मंत्री भी दे रहे हैं और उन पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई, फिर नीयत की बात.?
देखिए जिस पार्टी के लिए काम करने जा रहा हूं, उस भाजपा के फोरम से डेढ़ साल में चाहे प्रधानमंत्री हों या फिर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह किसी ने कोई भी ऐसी बात नहीं की। मेरी पार्टी की और प्रधानमंत्री की नीयत बिल्कुल साफ हैं। काम साफ हैं। वक्तव्य तो बदलते रहते हैं। पार्टी व्यापक है, सब लोग अपनी सोच व्यक्त कर सकते हैं। कुछ लोगों के बयान जरूर आए हैं जो पार्टी को स्वीकार्य नहीं है। उन्हें निश्चित तौर पर ही पार्टी की ओर से कड़ा संदेश दिया गया होगा।
क्या आपको भरोसा है कि बिहार में अल्पसंख्यकों खासतौर से मुस्लिमों के वोट भाजपा को मिलेंगे? क्योंकि लोकसभा चुनाव में वहां वोटों का ट्रेंड तो ऐसा नहीं था?
जब लोकसभा का चुनाव हो रहा था तो मोदी के बारे में कुछ सवाल खड़े किए थे। तब की और आज की सोच में बदलाव है। डेढ़ साल कार्यकाल लोग देख चुके हैं। अब कुर्सी पर बैठने के बाद मोदी के काम की चर्चा है। जो भ्रम दिखाया गया और डर दिखाया गया, वह सब बिल्कुल गलत निकला।
लेकिन दिल्ली में मुसलमानों ने भाजपा को हराने के लिए एकजुटता दिखाई?
आम आदमी पार्टी (आप) को सिर्फ मुसलमानों ने वोट नहीं दिया। छोटे-बड़े, अफसर से लेकर व्यापारी तक सभी का ध्रुवीकरण हुआ था। दिल्ली का परिणाम बिहार में नहीं हुआ।
आप और नीतीश कुमार आमने-सामने पड़ेंगे तो एक दूसरे के प्रति कैसा व्यवहार होगा?
(मुस्कराते हैं) नीतीश कुमार की अब तक की जो राजनीति रही है, वह धोखा देने की रही है। मैं उसी कड़ी का एक छोटा सा शख्स हूं, जिसने उन पर भरोसा कर ईमानदारी के साथ काम किया, लेकिन हमारी बारी आई तो उन्होंने धोखा दिया। जो शख्स उनका सबसे करीबी है, उसके साथ मुकर गए। फिर जो उनको वोट देता है, उससे कितनी जल्दी मुकर जाएंगे, समझा जा सकता है।
नीतीश के मुकाबले बिहार में भाजपा का चेहरा न होने की कमी की काट कैसे करेंगे?
अब बिहार में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव का चेहरा ऐसा मिल गया है कि सब बदल गया। भाजपा के पास जितने भी चेहरे हैं, सब उनसे बेहतर। वहां नेता मजबूरी का है, यहां मजबूती का नेता होगा।
बिहार में जातीय समीकरण सिर चढ़कर बोलते हैं, आपको नहीं लगता ये समीकरण नीतीश-लालू गठबंधन के पक्ष में हैं?
विश्लेषण सिर्फ एक कोण से किया जा रहा है। महादलित नीतीश के पाले से निकल चुका है। रामविलास पासवान के पास दलित है, वह भाजपा के खेमे में है। नौजवान तबका भाजपा को वोट देने के लिए तैयार है।
पिछली बार आपको भाजपा में रोकने वाले मुख्तार अब्बास नकवी से आपकी बात होती है?
हां बिल्कुल। उस घटना के दो-तीन दिन बाद बात हुई। मैंने केस किया। उन्होंने लिखित में माफीनामा मांगा तो मैंने वापस ले लिया। उन्होंने बाद में माना भी कि उन्हें गलतफहमी हुई। मैं इतना ही कह सकता हूं कि दूर से किसी के विषय में धारणा नहीं बनानी चाहिए। (साभार)
भगवा नहीं, भारत में आतंकवाद का रंग सिर्फ होता है हरा: शिवसेना
मुंबई। शिवसेना ने आतंकवाद के मसले पर फिर से विवादित बयान दिया है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में आज छपे संपादकीय में पार्टी ने 'भगवा आतंकवाद' को खारिज करते हुए लिखा है कि भारत में आतंकवाद का सिर्फ एक ही रंग है और वह है हरा। सामना के संपादकीय में कांग्रेस पर हमला करते हुए लिखा गया है कि देश में हिंदू आतंकवाद का नारा कांग्रेस का शुरू किया हुआ है। इससे पाकिस्तान को बहुत लाभ भी हुआ। सामना ने लिखा है कि आतंकवाद का कोई जाति और धार्मिक रंग नहीं होता, लेकिन भारत में आतंकवाद का रंग हरा है। पाक की तुलना में इस हरे आतंक को पालने-पोसने का काम कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने अधिक किया।देश में हिंदू आतंकवाद का नारा कांग्रेस ने लगाया। कांग्रेसियों की हिंदू आतंकवाद की राजनीति ने पाकिस्तानी साजिश को और बल दिया। शिवसेना ने अपने लेख में गृह मंत्री राजनाथ सिंह की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि उन्होंने यूपीए सरकार के इस प्रोपगंडा पर करारा प्रहार किया। शिवसेना का कहना है कि समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट और मालेगांव बम कांड का आरोप हिंदुओं के सिर मढ़ा गया है। शिवसेना ने लिखा है कि कांग्रेस सरकार ने अपने को धर्मनिरपेक्ष और निष्पक्ष साबित करने के चक्कर में पाकिस्तान के हाथों को मजबूती दी है।
संसद में हंगामा जारी, गतिरोध तोडऩे को सर्वदलीय बैठक जारी
नई दिल्ली। व्यापम और ललितगेट को लेकर संसद में हंगामे के बीच लोकसभा में कांग्रेस और वाम दलों के कार्य स्थगन प्रस्ताव को स्पीकर सुमित्रा महाजन ने नामंजूर कर दिया। सदन में आज भी कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में बांह पर काली पट्टी लगाकर पहुंचे हैं। वे लगातार वी वांट जस्टिस का नारा लगा रहे हैं। दूसरी ओर राज्यसभा में आज काम नहीं तो वेतन नहीं पर हंगामा हो रहा है। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने इस मुद्दे को सदन में उठाया। इस पर सदन में कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने पूर्व में एनडीए द्वारा किए गए हंगामे का जिक्र करते हुए कहा कि यदि काम नहीं तो वेतन नहीं लागू करना है तो 2004 से इसे लागू किया जाए। इस बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि वह ललित मोदी मुद्दे पर बयान देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ललित मोदी की मैंने मदद नहीं की। मेरे ऊपर लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि ललित मोदी को दिल्ली से ब्रिटिश सरकार को यात्रा वीजा के लिए कोई सिफारिश नहीं की गई थी। इस दौरान लगातार हंगामा होता रहा। इसके बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उधर, गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा 12 बजे बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खडग़े और गुलाम नबी आजाद हिस्सा लेने पहुंचे। इस बैठक में पीएम मोदी मौजूद नहीं है। सरकार की ओर से गृहमंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू हिस्सा ले रहे हैं। तमाम मुद्दे पर नायडू ने आज कहा कि संसद में गतिरोध खत्म करने के लिए यदि जरूरत पड़ी तो पीएम हस्तक्षेप कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम संसद में बयान दे सकते हैं। उन्होंंने कहा कि हम चाहते हैं कि संसद चले। सरकार हर मुद्दे पर बहस को तैयार हैं। विषय से संबंधित मंत्री भी अपना बयान दे सकते हैं। संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि वह हंगामा कर न केवल संसद की कार्यवाही रोक रही है, बल्कि वह देश की प्रगति में भी बाधा डाल रही है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि बातचीत से हल निकाला जाए। आज सावन का पहला सोमवार है, उम्मीद है कि कोई शुभ समाचार आएगा। गौरतलब है कि व्यापम और ललित मोदी मामले में विपक्ष लगातार सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि जब तक इस्तीफे नहीं होते, वह संसद की कार्यवाही को नहीं चलने देगा। वहीं सरकार लगातार हर मुद्दे पर चर्चा की अपील कर रही है।
कांग्रेस ने लोकतंत्र से अपना विश्वास खोया- गडकरी
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने संसद को न चलने देने को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सदन को सुचारु रूप से चलने देना नहीं चाहती हैं। गडकरी ने कहा कि व्यापम का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में संसद में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। गडकरी ने आज मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी द्वारा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर की गई टिप्पणी को अपरिपक्व और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या उपाध्यक्ष राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। मालूम हो कि राहुल ने ललित मोदी की कथित मदद पर सुषमा द्वारा किया गया आपराधिक कृत्य करार दिया था। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि पहले इस्तीफा, फिर चर्चा की मांग सही नहीं है। कांग्रेस ने लोकतंत्र से अपना विश्वास खो दिया है। मैं अपील करता हूं कि वह सदन को चलने दे। एनडीए के संसद में अवरोध उत्पन्न किए जाने पर उन्होंने कहा कि हमने कोयला घोटाला, स्पेक्ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाले पर सदन की कार्यवाही को रोका था। उस समय हमारी जेपीसी की मांग थी, लेकिन तत्कालनी यूपीए सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी। हम चर्चा चाहते थे, तो वो इससे पीछे हट रही थी। लेकिन आज मामला उलटा है। गडकरी ने कहा कि कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्ष पार्टियां सदन की कार्यवाही चलने देना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बहुमत का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे देश का विकास अवरुद्ध हो रहा है।
आरएसएस-बीजेपी मंथन- सत्ताधीशों को सुधारेंगे, रोकेंगे आतंकवाद
पचमढ़ी से दिल्ली तक आतंक से जंग पर चर्चा
भोपाल. न आतंक को लौटने देंगे न सत्ता में पहुंचे नेताओं को बिगडऩे देंगे। इसके लिए आरएसएस-भाजपा में कॉर्डिनेशन के साथ सत्ता में पद प्राप्त लोगों और संगठन के लोगों में सलाह-मश्विरा नियमित किया जाएगा। कुछ इसी तरह के बिंदु आतंक, सियासी हालात और पड़ोसी राज्यों से संबंधों पर इंडिया फाउंडेशन द्वारा पचमढ़ी के एक होटल में आयोजित बैठक में उभरे। बैठक का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। यहां विचार मंथन के लिए संघ  सहसरकार्यवाह सुरेश सोनी, दत्तात्रेय होसबोले, भाजपा के प्रवक्ता एमजे अकबर, जम्मू-कश्मीर के नेता सज्जाद लोन, सांसद अनिल माधव दवे समेत संघ से जुड़े तमाम विचारक पहुंचे हैं। बैठक के दौरान गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले के कारणों, चूक और पुनरावृत्ति रोकने के साथ संसद के गतिरोध पर चर्चा की गई। सुझाव आया कि विपक्ष द्वारा उठाए मसलों पर जनता को तथ्यात्मक जानकारी देकर भ्रम फैलने से रोकें। साथ ही सत्ता में बैठे नेताओं को बिगडऩे से रोकने के लिए संघ के अनुषांगिक संगठनों के साथ भाजपा के समन्वय पर जोर रहा। जिसमें कहा गया है कि भाजपा पदाधिकारी नीतिगत मामलों में अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों की सलाह जरूर लें। पंचायत और सहकारिता से जुड़े मामलों मे संघ से जुड़े नेताओं की राय को महत्व मिलना चाहिए।

जिला पंचायत अध्यक्ष को चाहिए महापौर जैसा प्रोटोकॉल, जनपद अध्यक्षों को पीली बत्ती
हर वीआईपी के आने की मिले सूचना, जिले के कार्यक्रम में मंच पर तय हो स्थान, पीली बत्ती को लेकर अड़े जनपद अध्यक्ष, कई मांगे होंगी रिफ्यूज
भोपाल. प्रदेश के सभी 51 जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष चाहते हैं कि उन्हें नगर निगम के महापौर की भांति प्रोटोकाल मिले। कलेक्टर और एसपी उनके बुलाने पर उपस्थित हों और योजनाओं की हर फाइल अध्यक्षों की नजरों से गुजरे। वहीं जनपद अध्यक्षों ने पीली पत्ती मिलने की वकालत की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अध्यक्षों की ऐसी मांगों पर पूरा खाका खींचा है। फाइल विभाग के मंत्री के पास भेजी गई है। जिला और जनपद पंचायतों के अध्यक्ष व उपाध्यक्षों की कई मांगों को लेकर पंचायत विभाग ने हाल ही में सम्मेलन आयोजित किया था।  कॉन्फें्रस में संकेत दिये गये थे कि जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। साथ ही अध्यक्षों की मंशा भी जानी गई थी। सूत्रों के अनुसार पंचायत जनप्रतिनिधि अपने प्रोटोकाल को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। अधिकारियों द्वारा तवज्जो नहीं देने पर नाराजगी है। लिहाजा, शासन पर दबाव बनाया जा रहा है कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष और जनपद अध्यक्ष व उपाध्यक्षों को पीली बत्ती दी जाये। सबसे महत्वपूर्ण मांग रखी गई है कि महापौर की तरह सम्मान मिले। जिला पंचायत अध्यक्ष चाहते हैं कि जिस तरह जिलों में होने वाले कार्यक्रमों और वीआईपी के आगमन पर महापौर को सूचना दी जाती है और मंच पर उसका आसन तय किया जाता है उसी तरह जिला पंचायत अध्यक्षों के बैठने का क्रम तय हो और सूचना भी विधिवत उनके पास पहुंचे।
गृह विभाग को भेजा जाएगा मामला
विभाग ने मांगों को लेकर खाका खींच लिया है। सूत्रों के अनुसार इस मसौदे में स्पष्ट कर दिया गया है कि अध्यक्षों को महापौर की तरह प्रोटोकाल मिलने का कोई प्रावधान नहीं है। तर्क दिया गया है कि महापौर जनता से चुना हुआ होता है और जिला व जनपद अध्यक्षों को सदस्य चुनते है। लाल और पीली बत्ती को लेकर मामला गृह विभाग में भेजने की सलाह दी गई है। गृह विभाग से अभिमत आने के बाद ही इस मामले में कोई निर्णय लिया जाएगा।
स्मार्ट विलेज में होगी खास भूमिका
विभाग तय करने जा रहा है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को स्मार्ट विलेज बनाने के नाम पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जायेगी। इसके लिये हर पहलुओं पर अध्ययन भी किया जा रहा है। स्मार्ट विलेज के लिये गेम चेंजर्स की भूमिका में लाने का एक मकसद है कि अध्यक्षों का ध्यान दूसरी मांगों से हटा दिया जाये।
मिनिट्स मंत्री के पास
मसौदा पिछले एक सप्ताह से पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव के पास है। उनके अध्ययन पर ही हां या ना होगी। लाल और पीली बत्ती का मसला टेढ़ा है, फिर भी गृह विभाग से मत लिया जायेगा। महापौर की भांति प्रोटोकाल दिये जाने के लिये भी उच्च स्तर पर ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा।
रघुवीर श्रीवास्तव, आयुक्त पंचायती राज
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यूपी में बिना परीक्षा दिए 10 हजार ने कर लिया बीएड
आगरा । अंबेडकर विवि में बीएड के सबसे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। अधिकारियों, कर्मचारियों और कॉलेज संचालकों ने करोड़ों रुपये लेकर बीएड के अंकपत्र बांट दिए। विशेष जांच दल (एसआइटी) ने बीएड सत्र 2005-06 में 10 हजार रोल नंबर जनरेट (बिना पढ़े रिजल्ट देना) के केस पकड़े हैं। इन सभी का ब्योरा विवि के चार्ट में दर्ज है, लेकिन कॉलेजों में इनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। आशंका है कि इनमें से हजारों छात्र शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं। इस मामले में अब बड़ी कार्रवाई होने जा रही है। हाईकोर्ट के आदेश पर विवि के बीएड सत्र 2005-06 में हुई धांधलियों की जांच एसआइटी कर रही है। टीम ने विवि से बीएड के चार्ट जब्त करने के बाद संबंधित बीएड कॉलेजों से उस सत्र में प्रवेश और परीक्षा देने वाले छात्रों का ब्योरा लिया। इसके बाद विवि के चार्ट में दर्ज छात्रों और कॉलेज के रिकॉर्ड में परीक्षा देने वाले छात्रों का मिलान किया गया।इसमें सनसनीखेज खुलासा हुआ है। 100 बीएड कॉलेजों में 80 से 120 रोल नंबर जनरेट किए गए। इस तरह विवि के चार्ट में 10 हजार ऐसे छात्रों का रिकॉर्ड दर्ज कर दिया गया, जिन्होंने बीएड में प्रवेश ही नहीं लिया और परीक्षा भी नहीं दी है। इन परीक्षार्थियों से 80 हजार से एक लाख रुपये तक लिए गए और चार्ट में रोल नंबर जनरेट कर मार्कशीट जारी कर दी गई। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि बीएड सत्र 2005-06 में एसआइटी की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। एसआइटी को सभी रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। उसकी रिपोर्ट के आधार पर परीक्षाफल में फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कुलपति सचिवालय स्थित कंप्यूटर सेल में हुआ खेल
बीएड सत्र 2005-06 की परीक्षा देर से कराई गई थी। एसआइटी की जांच में सामने आया है कि परीक्षाफल तैयार करने के लिए किसी एजेंसी से अनुबंध नहीं किया गया। विश्वविद्यालय के अकाउंट विभाग में भी इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। कुलपति सचिवालय के प्रथम तल पर स्थित कंप्यूटर सेल में परीक्षाफल तैयार किया गया, लेकिन लिखित में इसे तैयार करने की जिम्मेदारी किसी को नहीं दी गई थी।
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