Wed Apr 26 17:31:39

अब आरक्षण वालों को सिर्फ उनके ही कोटे में मिलेगी नौकरी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित वर्ग में ही नौकरी मिलेगी, चाहे उसने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक क्यों न हासिल किए हों। जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने कहा कि एक बार आरक्षित वर्ग में आवेदन कर उसमें छूट और अन्य रियायतें लेने के बाद उम्मीदवार आरक्षित वर्ग के लिए ही नौकरी का हकदार होगा। उसे सामान्य वर्ग में समायोजित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह फैसला आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार के मामले में दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उसे सामान्य वर्ग में नौकरी दी जाए, क्योंकि उसने लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक हासिल किए हैं। नियम का हवाला कोर्ट ने कहा कि डीओपीटी की 1 जुलाई 1999 की कार्यवाही के नियम तथा ओएम में साफ है एससी/एसटी और ओबीसी के उम्मीदवार को, जो अपनी मेरिट के आधार पर चयनित होकर आए हैं, उन्हें आरक्षित वर्ग में समायोजित नहीं किया जाएगा। उसी तरह जब एससी/एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए छूट के मानक जैसे उम्र सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, लिखित परीक्षा के लिए अधिक अवसर दिए गए हों तो उन्हें आरक्षित रिक्तियों के लिए ही विचारित किया जाएगा। ऐसे उम्मीदवार अनारक्षित रिक्तियों के लिए अनुपलब्ध माने जाएंगे। याचिकाकर्ता ने उम्र सीमा में छूट लेकर ओबीसी श्रेणी में आवेदन किया था। उसने साक्षात्कार भी ओबीसी श्रेणी में ही दिया था। इसलिए वह सामान्य श्रेणी में नियुक्ति के अधिकार के लिए दावा नहीं कर सकती।
फैसले के मायने
अगर कोई उम्मीदवार आवेदन भरते समय ही खुद को आरक्षित श्रेणी में बताता है और इसके तहत मिलने वाला लाभ लेता है। लेकिन बाद में उसके अंक सामान्य श्रेणी के कटऑफ के बराबर या अधिक होते हैं, तो भी उसका चयन आरक्षित सीटों के लिए ही होगा। इसके तहत उसे सामान्य वर्ग की सीटें नहीं मिलेंगी।
यह है मामला
दीपा पीवी ने वाणिज्य मंत्रालय के अधीन भारतीय निर्यात निरीक्षण परिषद में लैब सहायक ग्रेड-2 के लिए ओबीसी श्रेणी में आवेदन किया था। इसके लिए हुई परीक्षा में उसने 82 अंक प्राप्त किए। ओबीसी श्रेणी में उसे लेकर 11 लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। लेकिन इसी वर्ग में 93 अंक लाने वाली सेरेना जोसेफ को चुन लिया गया। जहां तक सामान्य वर्ग का सवाल था, वहां न्यूनतम कटऑफ अंक 70 थे। लेकिन कोई भी उम्मीदवार ये अंक नहीं ला पाया। दीपा ने इस श्रेणी में समायोजित करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया। इसके बाद दीपा सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
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दिग्विजय की तारीफ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पार्टी प्रवक्ता ने कहा- मैं आपका कुत्ता
भोपाल/राजगढ़. 2019 के विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने दिल्ली से जिले के पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। कांफ्रेंसिंग में कुछ नेताओं ने दिग्विजय की तारीफों के पुल बांधे तो हैरान करने वाली बातें भी कही। किसी पदाधिकारी ने खुद को दिग्विजय का कुत्ता बताया तो किसी किसी ने उन्हें साक्षात भगवान बताने में भी कसर नहीं छोड़ी। हालांकि दिग्विजय ऐसी तारीफों को टालते हुए अगली बात कहने का इशारा करते रहे। जिला कांग्रेस के कार्यालय में करीब एक घंटे 10 मिनट चली कांफ्रेंसिंग में 45 पदाधिकारियों ने दिग्विजय से बात की। दिग्विजय शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे थे तब जिला कांग्रेस के प्रवक्ता प्रदीप जैन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि 'मैं आपका कुत्ता हूं। 35 सालों से आपके लिए काम कर रहा हूं, लेकिन अब पार्टी में कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दी जा रही। इसी दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष जीरापुर प्रकाश पुरोहित ने भी हैरान करने वाली बात कही। उन्होंने श्री सिंह से कहा कि आप साक्षात भगवान हैं। आपको देखकर स्फूर्ति का संचार हो जाता है। कांग्रेस की कार्यकारी जिलाध्यक्ष मोना सुस्तानी ने कहा कि आप यहां आते हैं तो कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार हो जाता है। कांफ्रेंसिंग में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पोलिंग बूथ पर जाकर भाजपा की पोल खोलने को लेकर सहमति बनी। इस मौके पर पूर्व सांसद लक्ष्मणसिंह, पूर्व सांसद नारायणसिंह आमलाबे, कार्यकारी अध्यक्ष जिला कांग्रेस मोना सुस्तानी, रामचंदर दांगी, विधायक गिरीश भंडारी, पूर्व विधायक प्रियवृतसिंह खीची, हेमराज कल्पोनी, पुरुषोत्तम दांगी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
पूर्व विधायक बोले - पर्यवेक्षक न भेजें, अलग-अलग गुट घेर लेते हैं
वीसी में पूर्व विधायक प्रताप मंडलोई ने श्री सिंह से कहा कि विधान सभा चुनाव के टिकट के तीन महीना पहले उम्मीदवार को बता दिया जाए। सर्वे के लिए पर्यवेक्षक भी न भेजें क्योंकि अलग-अलग गुट उन्हें घेर कर दावेदारी करते हैं। टिकट न मिलने पर बाकी लोग उम्मीदवार को हराने में लग जाते हैं। अध्यक्ष शहर कांग्रेस शेख मुजीब ने सुझाव दिया पर्यवेक्षक भेजें, लेकिन टिकट के उम्मीदवारों को उनसे दूर रख कर कार्यकर्ताओं से राय शुमारी कराना चाहिए।
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पूरे गांव में पसरा था मातम, अर्थी छोड़ बाइट देने लगे एमपी के मिनिस्टर
भोपाल। छिंदवाड़ा के हर्रई के बारगी सहकारी समिति केंद्र में केरोसिन वितरण के दौरान आग लगने से मरे 13 लोगों की शवयात्रा में शामिल हुए कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने मीडिया को बाइट देने के लिए न सिर्फ शवयात्रा को रोका, बल्कि बाद में अर्थी छोड़ भी दी। कांग्रेस ने कहा, यह संवेदनहीनता की निशानी...
यह है पूरा मामला
-शुक्रवार को छिंदवाड़ा के हर्रई के बारगी सहकारी समिति केंद्र में केरोसिन वितरण के दौरान आग लगने से 13 लोग जिंदा जलकर मर गए थे। इनमें 9 पुरुष और 4 महिलाएं भी शामिल थीं। मृतकों में सहकारी समिति केंद्र का प्रबंधक और एक कर्मचारी भी शामिल है। -शनिवार को बारगी और बिच्छुआ दो गांवों में सुबह करीब 11.30 बजे अलग-अलग शवयात्रा निकाली गईं। मृतक इन दोनों गांवों के रहने वाले थे।
-किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन, कलेक्टर जेके जैन और एसपी गौरव तिवारी सहित बड़ी संख्या में लोग बारगी में निकाली गई शवयात्रा में शामिल हुए।
-इस दौरान छिंदवाड़ा विधायक चौधरी चंद्रभान सिंह और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष अनुसुइया उइके भी मौजूद थीं।
-शवयात्रा के दौरान मीडिया को अपनी बाइट देने के चक्कर में मिनिस्टर ने न सिर्फ शवयात्रा रोक दी, बल्कि उसे तुरंत किसी और को सौंप दिया।
-यह वीडियो सोशल साइट पर वायरल होते ही तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।
-मप्र कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा ने इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया है।
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अगले 3-4 दिनों तक ऐसा ही रहेगा मौसम, 27 अप्रैल से आएगा गर्मी का अगला दौर
भोपाल। मौसम केंद्र के डायरेक्टर डॉ अनुपम काश्यपि ने बताया कि तीन- चार दिन तक मौसम में कोई खास बदलाव के आसार नहीं हैं। 27 अप्रैल से फिर गर्मी का एक दौर आ सकता है। रविवार को दिन का तापमान 41 और रात का 25 डिग्री रहने का अनुमान है। पढ़ें पूरी खबर...
शनिवार से मिली थोड़ी राहत
दस दिन से तप रही राजधानी को शनिवार को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। दस दिन बाद पारा 40 डिग्री से ज्यादा नीचे आया। दिन का तापमान 2.5 डिग्री लुढ़क गया। रात के तापमान में भी गिरावट हुई। शनिवार को दिन का तापमान 39.8 डिग्री दर्ज किया गया। दिन में ज्यादा तपिश भी नहीं थी। सुबह नौ बजे तक तपिश ज्यादा नहीं थी। हवा में भी थोड़ी ठंडक थी। शुक्रवार को दिन का तापमान 42.3 डिग्री दर्ज किया गया था।
रात का तापमान 25.1 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 2 डिग्री अधिक रहा। इससे पहले 12 अप्रैल को दिन का तापमान 38.7 डिग्री दर्ज किया गया था। तबसे पारा 41- 42 डिग्री से ऊपर बना हुआ था।
क्यों बदला मौसम
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि हवा का रुख बदलकर दक्षिण पश्चिमी हो गया है, इसकी वजह से मौसम में बदलाव आया है। अभी तक पश्चिमी हवा से राजधानी समेत पूरा प्रदेश तप रहा था। यह हवा राजस्थान की ओर से आ रही थी।
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योगी ने डिंपल, आजम की जेड+ सिक्युरिटी हटाई; बीजेपी के कटियार की सुरक्षा बढ़ी
लखनऊ.योगी सरकार ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्नी सांसद डिंपल यादव, पूर्व मंत्री आजम खान, शिवपाल यादव और एसपी महासचिव रामगोपाल यादव की जेड+ सिक्युरिटी को घटाकर ङ्घ कैटेगरी कर दिया गया है। इसके अलावा सपा सरकार के करीबी 100 अन्य लोगों की सुरक्षा भी वापस ले ली गई है। हालांकि, सरकार ने मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और मायावती की जेड प्लस सिक्युरिटी को जारी रखा है। वहीं, बीजेपी के सीनियर नेता और राज्यसभा मेंबर विनय कटियार की सिक्युररिटी बाई कैटेगरी से बढ़ाकर जेड कैटेगरी की कर दी गई है।
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मोदी की अगुवाई में नीति आयोग की तीसरी मीटिंग, विकास के रोडमैप पर चर्चा
नई दिल्ली.नरेंद्र मोदी की अगुवाई में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की तीसरी मीटिंग रविवार को हो रही है। इसमें पहले दो मीटिंग में लिए गए फैसलों पर चर्चा होगी। मीटिंग में आयोग के वाइस प्रेसिडेंट अरविंद पनगढिय़ा देश में तेजी से विकास के लिए एक रोडमैप भी पेश करेंगे।
राज्यों के सीएम भी होंगे शामिल...
- न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नीति आयोग की मीटिंग में राज्यों के सीएम भी शामिल हुए।
- पनगढिय़ा के रोडमैप में 15 साल के विजन डॉक्युमेंट के प्रमुख बिंदु होंगे। इसके अलावा 7 साल का स्ट्रैटजी डॉक्युमेंट और 3 साल का एक्शन प्लान भी पेश किया जाएगा।
- मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान किसानों का आय दोगुनी करने का रोडमैप का प्रेजेंटेशन देंगे।
मोदी ने किए ट्वीट
- मोदी ने ट्वीट किया, "राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ नीति आयोग की मीटिंग में भारत में बदलाव को लेकर विकास का मुद्दा अहम रहेगा। राज्यों ने कई क्षेत्रों में रिफॉम्र्स किए हैं। ये मीटिंग एक-दूसरे को सीखने का मौका है।"
- "नीति आयोग के चेयरमैन बताएंगे कि कितनी तेजी से देश को विकास की राह पर ले जाया जा सकता है। मीटिंग में जीएसटी पर भी प्रेजेंटेशन होगा।"
- "मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज एग्रीकल्चर के क्षेत्र में एक रेवोल्यूशन लेकर आए हैं। वे भी किसानों की आय दोगुनी करने को लेकर प्रेजेंटेशन देंगे।"
नीति आयोग की हो चुकी हैं दो मीटिंग
- नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की पहली मीटिंग में केंद्र और राज्यों के बीच राष्ट्रीय मुद्दों और योजनाओं पर सहयोग करने को लेकर चर्चा हुई थी।
- दूसरी मीटिंग में सतत विकास के लिए मुख्यमंत्रियों के तीन सबग्रुप और गरीबी हटाने-एग्रीकल्चर डेवलपमेंट के लिए 2 टास्क फोर्स बनाई गई थीं।
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बाबरी कांड : आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 13 पर चलेगा आपराधिक साजिश का केस?
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक अहम सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह समेत 13 लोगों पर आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चले या नहीं? साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि रायबरेली और लखनऊ में चल रहे दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ लखनऊ की अदालत में की जाए या नहीं?छह अप्रैल को आदेश सुरक्षित रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम इस मामले में इंसाफ करना चाहते हैं.  एक ऐसा मामला जो 17 सालों से सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी की वजह से रुका है. इसके लिए हम संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल कर आडवाणी, जोशी समेत सभी पर आपराधिक साजिश की धारा के तहत ट्रायल फिर से चलाने का आदेश दे सकते हैं. साथ ही मामले को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर सकते हैं.  25 साल से मामला लटका पड़ा है, हम डे-टू-डे सुनवाई करके दो साल में सुनवाई पूरी कर सकते हैं. सन 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी,  यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महज टेक्निकल ग्राउंड पर इनको राहत नहीं दी जा सकती और इनके खिलाफ साजिश का ट्रायल चलना चाहिए. बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में दो अलग-अलग अदालतों में चल रही सुनवाई एक जगह क्यों न हो? कोर्ट ने पूछा था कि रायबरेली में चल रहे मामले की सुनवाई को क्यों न लखनऊ ट्रांसफर कर दिया जाए, जहां कारसेवकों से जुड़े एक मामले की सुनवाई पहले से ही चल रही है. वहीं लालकृष्ण आडवाणी की ओर से इसका विरोध किया गया. कहा गया कि इस मामले में 183 गवाहों को फिर से बुलाना पड़ेगा जो काफी मुश्किल है. कोर्ट को साजिश के मामले की दोबारा सुनवाई के आदेश नहीं देने चाहिए. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा आडवाणी,  यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश का ट्रायल चलना चाहिए. सीबीआई ने कहा रायबरेली के कोर्ट में चल रहे मामले का भी लखनऊ की स्पेशल कोर्ट के साथ ज्वाइंट ट्रायल होना चाहिए. इलाहाबाद हाईकोर्ट के साजिश की धारा को हटाने के फैसले को रद्द किया जाए. दरअसल आडवाणी, कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और बीजेपी, विहिप के अन्य नेताओं पर से आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इससे संबंधित अपीलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 20 मई 2010 के आदेश को खारिज करने का आग्रह किया गया है. हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) हटा दी थी. पिछले साल सितंबर में सीबीआई ने शीर्ष अदालत से कहा था कि उसकी नीति निर्धारण प्रक्रिया किसी से भी प्रभावित नहीं होती और वरिष्ठ भाजपा नेताओं पर से आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाने की कार्रवाई उसके (एजेंसी के) कहने पर नहीं हुई. सीबीआई ने एक हलफनामे में कहा था कि सीबीआई की नीति निर्धारण प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र है. सभी फैसले मौजूदा कानून के आलोक में सही तथ्यों के आधार पर किए जाते हैं. किसी शख्स, निकाय या संस्था से सीबीआई की नीति निर्धारण प्रक्रिया के प्रभावित होने या अदालतों में मामला लडऩे के उसके तरीके के प्रभावित होने का कोई सवाल नहीं है.
क्या है मामला : कब क्या हुआ
सन 1992 मे बाबरी मस्जिद गिराने को लेकर दो एफआईआर 197 और 198 दर्ज की गई.
197 कार सेवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.
मस्जिद से 200 मीटर दूर मंच पर मौजूद 198 नेताओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई.
यूपी सरकार ने 197 के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इजाजत लेकर ट्रायल के लिए लखनऊ में दो स्पेशल कोर्ट बनाईं.
शेष 198 के लिए रायबरेली के कोर्ट में मामला चला.
197 के केस की जांच सीबीआई को दी गई जबकि 198 की जांच यूपी सीआईडी ने की.
198 के तहत रायबरेली में चल रहे मामले में नेताओं पर 120 बी एफआईआर में नहीं था लेकिन 13 अप्रैल 1993 में पुलिस ने चार्जशीट में आपराधिक साजिश की धारा जोडऩे की कोर्ट में अर्जी लगाई और कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई गई जिसमें मांग की गई कि रायबरेली के मामले को भी लखनऊ स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए.
साल 2001 में हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में ज्वाइंट चार्जशीट भी सही है और एक ही जैसे मामले हैं. लेकिन रायबरेली के केस को लखनऊ ट्रांसफर नहीं किया जा सकता क्योंकि राज्य सरकार ने नियमों के मुताबिक 198 के लिए चीफ जस्टिस से मंजूरी नहीं ली
केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. पुनर्विचार और क्यूरेटिव पिटीशन भी खारिज कर दी गई.
रायबरेली की अदालत ने बाद में सभी नेताओं से आपराधिक साजिश की धारा हटा दी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 मई 2010 को आदेश सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
2011 में करीब 8 महीने की देरी से सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी.
2015 में पीडि़त हाजी महमूद हाजी ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की.
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योगी आदित्य नाथ ने रद्द किया अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट
उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ एक के बाद एक बड़े फैसले ले रहे हैं। सत्ता में आने के एक महीने बाद ही योगी सरकार ने पूर्व अखिलेश सरकार के समय शुरु की गई स्मार्ट फोन योजना को रद्द कर दिया है। योगी सरकार अखिलेश सरकार का नाम प्रदेश से मिटाने के लिए जी-जान लगा रही है। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान योगी आदित्य नाथ ने कई बड़े फैसले लिए। बुधवार को योगी सरकार ने फैसला किया कि समाजवादी पार्टी सरकार की स्मार्ट फोन योजना समेत जनेश्वर मिश्रा ग्राम योजना, लोहिया आसरा और आवास योजना को रद्द किया जाएगा। बता दें कि अखिलेश सरकार ने स्मार्ट फोन योजना अपने आखिरी कार्यकाल के दौरान लांच की थी। इस योजना के जरिए अखिलेश सरकार काफी सस्ते दामों पर करीब 5 करोड़ लोगों को फोन मुहैया कराना चाहती थी। इस योजना के जरिए अखिलेश सरकार सीधे आम जनता के साथ संपर्क रखना चाह रही थी। इस योजना के लिए एक लाख से ज्यादा लोग आवेदन दे चुके थे। अखिलेश की इस योजना का मकसद था कि सरकार की प्रत्येक योजना के बारे में आम जनता को जानकारी दी जाए। इससे पहले पेंशन योजना, समाजवादी एम्बुलेंस योजना और अन्य कई योजनाएं जिनपर समाजवादी पार्टी का नाम था, उनसे समाजवादी पार्टी का नाम योगी सरकार हटा चुकी है। इसके साथ ही जिन राशन कार्ड पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की फोटो है, उन कार्ड को वापस ले लिया गया है। वहीं योगी सरकार ने मंगलवार को कुल 626 पुलिसवालों का ट्रांसफर किया। बता दें कि योगी सरकार चाहती है कि प्रदेश में प्रशासन व्यवस्था अच्छी हो इसलिए सरकार तबादले कर रही है। योगी सरकार ने प्रदेश के कुछ हवाईअड्डों के नाम भी बदले हैं, जिनमें गोरखपुर और आगरा का हवाईअड्डा शामिल है।
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सत्ता में आने के बाद कांग्रेसी तौर-तरीक़ों से बचें, पार्टी नेताओं को पीएम नरेंद्र मोदी की कड़ी नसीहत
नई दिल्ली: भुवनेश्वर में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने समापन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को सत्ता में आने पर व्यवहार में संयम और सुख-सुविधाओं से बचने की नसीहत दी है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब हम विपक्ष में थे तब हमारा रहन-सहन जैसा था वैसा ही सत्ता में आने के बाद रहना चाहिए वर्ना हममें और उनमें (कॉंग्रेस) क्या फर्क रह जाएगा. पीएम मोदी ने कहा कि हम लोग अपना घर-परिवार और सुख-सुविधा छोड़ कर आए हैं. लेकिन सत्ता में आने के बाद अगर उसी सुख-सुविधा, रहन-सहन और मानसिकता के साथ अगर रहने लगें जो हमसे पहले वालों की थी तो यहाँ आने का क्या मतलब? उन्होंने कहा कि लोगों ने सब कुछ छोड़ कर अपना पूरा जीवन लगा दिया. पार्टी के किसी भी नेता के लिए कर्तव्य परिवार से पहले है. पीएम मोदी ने शुचिता और भ्रष्टाचार मुक्त आचरण पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत फ़ायदों के लिए काम नहीं करना चाहिए. पीएम मोदी की ये नसीहत ऐसे समय आई है जब कई कॉंग्रेसी नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा है. हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि दोनों बातों में संबंध नहीं है क्योंकि बीजेपी यह कहती आई है कि जो कोई भी बीजेपी की विचारधारा में विश्वास व्यक्त करता हो और साफ छवि का हो, बीजेपी में उसका स्वागत है. उनके मुताबिक पीएम की नसीहत पार्टी नेताओं ख़ासतौर से मंत्रियों के लिए थी कि सत्ता में आने के बाद उन्हें अपने तौर-तरीके और रहन-सहन नहीं बदलना चाहिए.
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सीएम सर्वानंद सोनोवाल के क्षेत्र में साइकिल पर ले जाता दिखा भाई का शव
गुवाहाटी: ओडिशा के कालाहांडी जिले में पत्नी का शव कंधे पर लेकर 10 किलोमीटर तक चलने वाले दाना मांझी की तस्वीर ने पूरी दुनिया की नजरें अपनी ओर खींची थी. अब असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के विधानसभा क्षेत्र मजुली में ऐसी ही घटना सामने आई है. असम के अखबारों में प्रकाशित तस्वीर में दिख रहा है कि एक शख्स अपने 18 वर्षीय भाई का शव साइकिल से ले जा रहा है. बताया जा रहा है कि गांव की सड़क इतनी खराब है कि कोई भी गाड़ी वाला उसके भाई के शव को ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ. आखिरकार उसने भाई के शव को कपड़ों में लपेटकर साइकिल पर रख लिया और उसे लेकर निकल पड़ा. एक स्थानीय न्यूज चैनल पर तस्वीर आने के बाद मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. साथ ही राज्य के उच्च पदस्थ स्वास्थ्य अधिकारियों को मौके पर पहुंचने का आदेश दिया है. खबर के मुताबिक मरने वाला युवक लखीमपुर जिले के बालिजान गांव का रहने वाला था. इस गांव से अस्पताल की दूरी करीब आठ किलोमीटर है। मृतक के भाई ने कहा कि मंगलवार को अस्पताल में उसके भाई की मौत हो गई थी. इसके बाद वह वहां से अपने भाई का शव साइकिल में बांधकर गांव के लिए निकल पड़ा था. इस मामले में  मजुली के डिप्टी कमिश्नर पीजी झा ने बताया कि युवक की मौत गारामुर सिविल अस्पताल में हुई है. इस घटना पर कहा कि मृतक के गांव बालीजान में जाने के लिए ऐसी सड़क नहीं है कि वहां गाड़ी ले जाया जा सके. इस गांव में जाने के लिए बांस के अस्थायी पुल से भी गुजरना होता है. सोमवार को अस्पताल में भर्ती कराए गए युवक को श्वास लेने में तकलीफ थी. उसके मौत की वजह भी यही बताई गई है. गारामुर सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट माणिक का कहना है कि मरने वाले युवक को बेहद गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था. काफी प्रयास के बाद भी उसे नहीं बचाया जा सका. डॉक्टर ने शव को ले जाने के लिए वाहन मुहैया कराने का आदेश दिया था, लेकिन परिजन खुद ही शव हो लेकर अस्पताल से चले गए.
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